मरकुस i
मरकुस रचित सुसमाचार
मरकुस के अनुसार सुसमाचार (खुशी की खबर)
लेखकः
मरकुस बरनबास का चचेरा भाई था। विश्‍वस्त सूत्रों से मालूम पड़ता है कि उसने पतरस, बरनबास और पौलुस के साथ मिलकर सेवकाई की थी। 1 पतर. 5:13 से तुलना करें। यह संभव है कि जो कुछ उसने अपनी इस पुस्तक में लिखा वह उसे पतरस ने बताया था। मरकुस का दूसरा नाम यूहन्ना (प्रे.काम 12:12) था।
समयः
यीशु मसीह के मरने-जी उठने के कुछ वर्षों बाद। कुछ जानकार यह मानते हैं कि यह पुस्तक दूसरी अन्य पुस्तकों जैसे मत्ती, लूका और यूहन्ना द्वारा लिखी पुस्तकों, से पहले लिखी गयी। लेकिन हमारे पास इसका कोई ठोस सबूत नहीं है।
विषयः
मरकुस मसीह को परमेश्‍वर के पुत्र (देह में परमेश्‍वर) के रूप में प्रस्तुत करता है (1:1)। यह यीशु परमेश्‍वर और मनुष्य के सेवक बन गए और इन्होंने लोगों के बीच अद्भुत काम किए (प्रे.काम 10:38; रोमि. 15:8-9 से तुलना करें)। उन्हों ने दो बार यह बात कही कि दूसरों की सेवा ही सच्चा बड़प्पन (या सच्ची महानता) है (9:35; 10:42-45)। ऐसा उन्हों ने अपने जीवनकाल में कर भी दिखाया। यीशु मसीह की शिक्षाओं से अधिक मरकुस ने उनके कार्यों पर ज़ोर डाला। उदाहरण के लिए उसने चार दृष्टांतों का वर्णन किया, लेकिन अठ्ठारह आश्चर्यकर्मों का। मत्ती 14 दृष्टांतों और लूका 15 दृष्टांतों का वर्णन करता है। पहाड़ी उपदेश को मरकुस ने अपनी पुस्तक में स्थान नहीं दिया।
मुख्य शब्दः
जिनका उपयोग हुआ है, राजा, परमेश्‍वर का राज्य और पूरा हुआ आदि है।