मत्ती i
मत्ती रचित सुसमाचार
मत्ती के अनुसार सुसमाचार (खुशी की खबर)
लेखकः
मत्ती, यीशु के आरम्भिक शिष्यों में से एक था। वह लेवी नाम से भी जाना जाता था। जब यीशु ने उसे अपना शिष्य होने के लिए बुलाया, उस समय वह टैक्स कलेक्टर का काम किया करता था। देखें मत्ती 9:9-13; मरकुस 2:13-17; लूका 5:27-32. उसने स्वयं इस बात का दावा नहीं किया कि वही इस पुस्तक (सुसमाचार) का लेखक है। किन्तु प्रथम शताब्दी के मसीहियों का यही मत था। बाईबल की किताबों के लेखकों के बारे में हम जब सोचते हैं तो यह जानें कि परमेश्‍वर स्वयं उसके लेखक हैं। देखें 2 तीमु. 3:16-17; 2 पतर. 1:21. प्रायः मानवीय लेखकों ने अपना परिचय नहीं दिया। इसका कारण यह था कि वे नहीं चाहते थे कि लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करें बजाए परमेश्‍वर के, जिन्होंने उनको लिखने के लिए प्रेरित किया था। उन में से हर एक भजन संहिता 115 के लेखक से सहमत होगा, जिसने कहा था, “प्रभु हमारा नाम नहीं, लेकिन आपका नाम ऊँचा हो।” भजन 115:1
समयः
यीशु की मृत्यु और जी उठने के कुछ वर्षों बाद, शायद पहली शताब्दी के मध्य में। हमें सही तारीख की जानकारी नहीं है।
विषयः
मत्ती यीशु के जन्म, जीवनकाल, उनकी शिक्षाओं-कार्यों और मौत-पुनरूत्थान सभी के बारे में लिखता है। उनकी प्रतिज्ञा पुराने नियम में की गयी थी कि वह एक राजा होंगे, जो परमेश्‍वर के राज्य को लाएँगे। मत्ती उन्हें परमेश्‍वर के अभिषिक्‍त के रूप में प्रस्तुत करता है। इस सुसमाचार में पुराने नियम में वर्णित भविष्यद्वाणियों की ओर साठ बार इशारा किया गया है। पुराने नियम ही से चालीस पदों का उल्लेख भी है।
मुख्य शब्दः
जिनका उपयोग हुआ है, राजा, परमेश्‍वर का राज्य और पूरा हुआ आदि हैं।